Sunday, 1 March 2026

कविता. ५७९८. हर उजियारा कोई।

                               हर उजियारा कोई।

हर उजियारा कोई कहानी देता है किनारों से जुडकर मुस्कान की निशानी देता है और लम्हों संग अल्फाजों की दुनिया सरगम सुनाती है।

हर उजियारा कोई उम्मीद देता है एहसासों से जुडकर उमंग की आहट देता है और कदमों संग बदलावों की पुकार सरगम सुनाती है।

हर उजियारा कोई कोशिश देता है अफसानों से जुडकर सोच की परख देता है और अरमानों संग लहरों की सुबह सरगम सुनाती है।

हर‌‌ उजियारा कोई आवाज देता है खयालों से जुडकर अंदाज की लहर देता है और धाराओं संग आशाओं की महफिल सरगम सुनाती है।

हर उजियारा कोई दास्तान देता है दास्तानों से जुडकर नजारे की पहचान देता है और अल्फाजों संग उम्मीदों की सौगात सरगम सुनाती है।

हर उजियारा कोई तलाश देता है सपनों से जुडकर कोशिश की सुबह देता है और जज्बातों संग दिशाओं की उमंग सरगम सुनाती है।

हर उजियारा कोई आहट देता है इशारों से जुडकर रोशनी की सौगात देता है और अदाओं संग उम्मीदों की आस सरगम सुनाती है।

हर उजियारा कोई तराना देता है आवाजों से जुडकर एहसास की पुकार देता है और राहों संग खयालों की सोच सरगम सुनाती है।

एक उजियारा कोई पहचान देता है अंदाजों से जुडकर सुबह की आवाज देता है और अफसानों संग सपनों की पुकार सरगम सुनाती है।

एक उजियारा कोई राह देता है नजारों से जुडकर मुस्कान की तलाश देता है और तरानों संग जज्बातों की परख सरगम सुनाती है।


कविता. ५७९८. हर उजियारा कोई।

                               हर उजियारा कोई। हर उजियारा कोई कहानी देता है किनारों से जुडकर मुस्कान की निशानी देता है और लम्हों संग अल्फाजो...