Saturday, 2 July 2016

कविता. ७७८. तूफानों से क्या डरना।

                                         तूफानों से क्या डरना।
हर बार तूफानों से क्या डरना हम मन को यह समझाते है पर जब तूफान आते है हम जाने क्यूँ कतराते है जीवन को समझना चाहते है।
तूफान को समझ लेने कि जरुरत हम हर बार जीवन मे रखते रहते है क्योंकि तूफानों को हर बार हम लेना चाहते है जिसे समझ लेना चाहते है।
तूफान जब सही दिशाए दे जाते है उन तूफानों को हम उम्मीदों से हम देखना और समझ लेना चाहते है क्योंकि उनसे ही हम दुनिया को परख लेना चाहते है।
जब जीवन मे अँधियारा होता है हम जीवन कि कहानी को समझ लेना चाहते है जीवन को परख लेने कि जरुरत हर पल को होती है।
जीवन मे कभी कभी तूफानों को समझ लेने कि जरुरत होती है उनसे ही तो अक्सर खुशियों कि कहानी जीवन मे बन पाती है रोशनी दे पाती है।
जीवन मे तूफानों को भी समझकर आगे बढते रहने कि जरुरत हर बार होती है क्योंकि जीवन मे तूफानों से ही तो अक्सर जीवन कि दिशाए बनती है।
जीवन मे जो बाते समझ लियी जाती है वह तूफानों से ही तो आगे बढती आती है जिनमे दुनिया कि अलग साँसे जिन्दा हो पाती है।
जीवन कई तूफानों से ही तो बनता है जिन्हे समझ लेना अक्सर दुनिया को नई उम्मीदे  देकर रोशनी दे पाता है जिसकी जीवन को जरुरत होती है।
तूफानों से लढने से ही तो खुशियाँ मुमकिन हो पाती है जो जीवन को रोशनी का एहसास देकर आगे बढती चली जाती है।
तूफान से लढने कि जरुरत हर बार होती है जो जीवन कि सच्ची प्यास होती है जो जीवन को नई उम्मीदे और आशाए देकर आगे बढती चली जाती है।

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