Saturday, 20 August 2016

कविता. ८७६. किसी बात को बार बार दोहराने से।

                                   किसी बात को बार बार दोहराने से।
किसी बात को बार बार दोहराने से वह सच नही होती है पर वह झूठ भी नही बन पाती है बात मे सच और झूठ का एहसास अलगसा हर बार रहता है जो जीवन को कई पटरीओं से लेकर हर बार चलता रहता है।
किसी बात को बार बार कह दे यह बात अहम नही होती  या कम बार कह दे तो बात कम नही होती  बात कि अहमियत हम मन से कहते या नही कहते इस सोच से होती है क्योंकि वही बात तो जीवन पर असर कर देती है।
किसी बात को बार बार कहते रहने से दुनिया मे अहमियत बढती या कम नही होती वह तो दो पल का एहसास है उस से हमारी दुनिया बनती या फिर बिघडती नही है क्योंकि बात को समझ लेने के लिए कई एहसासों कि जरुरत हर बार होती है।
किसी बात को बार बार कह दे तो मन से बात तो निकल जाती है पर झूठ दोहराने से दुनिया कुछ बेहक भी जाये पर वह बात अच्छी नही होती  क्योंकि झूठ कि नीव एक जहर है जिसकी हकिकत हम कितना भी बदलकर बता दे पर सच्ची नही होती है।
किसी बात को बार बार कह दे तो सारी दुनिया उसे सुन तो पाती है और मान भी ले कुछ पल पर आखिर मे उसकी नीव सच्ची नही होती  वह जो चोट देती है उस चोट कि कहानी मन के लिए खुशियों भरी नही होती  उसमे उम्मीदे नही होती है।
किसी बात को बार बार कह देते है लोग ताकी सच को दुनिया ना जाने पर उस असर कि कहानी अच्छी नही होती जीवन को सच समझ लेने कि जरुरत हर बार होती है क्योंकि वरना किंमत देकर सच्चाई सुननी पडती है।
किसी बात को बार बार हम कह दे और लोग उस पर चल पडे तो उन्हे रोकने कि राह नही होती पर कभी ना कभी तो हर मोड पर सच्चाई को समझ लेने कि जरुरत हर बार होती है जो जीवन कि अहमियत होती है जो आगे लेकर चलती है।
किसी बात को बार बार हम कह दे तो जीवन कि धारा बिना बने नही रहती क्योंकि सच्चाई मे ही तो जीवन कि नीव बनती है जिसे समझ लेने कि जरुरत हर दिशा मे हर मोड पर अक्सर बनती है जो दिशाए देती है।
किसी बात को बार बार कह दे तो एक बार कहे सच उमर छोटी नही होती क्योंकि सच कि धारा तो अपनी राह हर बार बना लेती है सच एक बार कह दे तो भी उसे दोहराने कि चाहत सबको बार बार होती है जो जीवन को ताकद देती है।
किसी बात को बार बार कह देनेवालों को एक बात अक्सर समझ लेना जरुरी होता है कि कितनी बार भी दोहरा दे पर झूठ कि उमर नही बढती  और हर बार दोहराने से सच्चाई ऐसे चमकती है कि उमर बढाने कि उसे जरुरत नही होती है।

No comments:

Post a Comment

कविता. ५८४४. इशारों की आहट संग।

                           इशारों की आहट संग। इशारों की आहट संग आवाजों से जुडकर अंदाजों की समझ तलाश दिलाती है किनारों को कदमों की आस अरमान द...