Thursday, 2 July 2026

कविता. ५९१७ दिशाओं की महफिल अक्सर।

                         दिशाओं की महफिल अक्सर।

दिशाओं की महफिल अक्सर आशाओं को अफसानों से पुकार दिलाती है जज्बातों को बदलावों की मुस्कान खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर दास्तानों को नजारों से अफसाना दिलाती है लहरों को किनारों की अहमियत खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर अरमानों को लम्हों से नजारा दिलाती है इरादों को आवाजों की कहानी खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर धाराओं को उम्मीदों से उमंग दिलाती है अंदाजों को इशारों की पहचान खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर राहों को एहसासों से तलाश दिलाती है अल्फाजों को कदमों की आस खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर अदाओं को तरानों से कोशिश दिलाती है दास्तानों को सपनों की पुकार खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर उजालों को अंदाजों से अफसाना दिलाती है आशाओं को एहसासों की रोशनी खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर आवाजों को धाराओं से अरमान दिलाती है धाराओं को उम्मीदों की सरगम खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर कदमों को आशाओं से पहचान दिलाती है तरानों को इशारों की सौगात खयाल सुनाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर अफसानों को उम्मीदों से तलाश दिलाती है उजालों को नजारों की आहट खयाल सुनाती है।

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कविता. ५९१७ दिशाओं की महफिल अक्सर।

                         दिशाओं की महफिल अक्सर। दिशाओं की महफिल अक्सर आशाओं को अफसानों से पुकार दिलाती है जज्बातों को बदलावों की मुस्कान खया...