Wednesday, 1 July 2026

कविता. ५९१६ किनारों संग एहसासों की।

                           किनारों संग एहसासों की।

किनारों संग एहसासों की कोशिश सुबह दिलाती है उजालों को सपनों की पहचान सरगम सुनाती है तरानों की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की उमंग दास्तान दिलाती है लहरों को खयालों की सोच इशारा सुनाती है जज्बातों की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की रोशनी अरमान दिलाती है बदलावों को धाराओं की समझ कोशिश सुनाती है इरादों की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की तलाश अफसाना दिलाती है आशाओं को अंदाजों की राह अहमियत सुनाती है अदाओं की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की परख अल्फाज दिलाती है नजारों को अरमानों की सुबह पहचान सुनाती है दिशाओं की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की आवाज धून दिलाती है जज्बातों को दास्तानों की राह उम्मीद सुनाती है लम्हों की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की सरगम अल्फाज दिलाती है अदाओं को दिशाओं की महफिल उम्मीद सुनाती है आशाओं की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की आस पुकार दिलाती है इशारों को धाराओं की रोशनी खयाल सुनाती है कदमों की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की आहट उजाला दिलाती है दास्तानों को अरमानों की सोच मुस्कान दिलाती है राहों की पुकार सुनाती है।

किनारों संग एहसासों की सुबह तराना दिलाती है अफसानों को कदमों की समझ पहचान दिलाती है दिशाओं की पुकार सुनाती है।


कविता. ५९१६ किनारों संग एहसासों की।

                           किनारों संग एहसासों की। किनारों संग एहसासों की कोशिश सुबह दिलाती है उजालों को सपनों की पहचान सरगम सुनाती है तरानो...