Friday, 24 July 2026

कविता. ५९३९ किनारों पर आशाएं अक्सर।

                         किनारों पर आशाएं अक्सर।

किनारों पर आशाएं अक्सर लहरों की कहानी देकर जाती है अरमानों को दास्तानों की पुकार कोशिश संग खयाल दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर सपनों की पहचान देकर जाती है आवाजों को धाराओं की सौगात सरगम संग  खयाल दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर अंदाजों की दास्तान देकर जाती है जज्बातों को बदलावों की आहट आस संग खयाल दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर लम्हों की मुस्कान देकर जाती है तरानों को अफसानों की समझ अंदाज संग खयाल दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर राहों की अहमियत देकर जाती है कदमों को अल्फाजों की तलाश रोशनी संग खयाल दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर एहसासों की सौगात देकर जाती है उजालों को नजारों की सरगम सुबह संग खयाल दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर धाराओं की समझ देकर जाती है आवाजों को अदाओं की धून आस संग खयाल‌ दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर कदमों की पहचान देकर जाती है दिशाओं को जज्बातों की सोच उम्मीद संग खयाल दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर इशारों की सरगम देकर जाती है लहरों को धाराओं की अहमियत कहानी संग खयाल‌ दिलाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर अफसानों की रोशनी देकर जाती है सपनों को लम्हों की कोशिश अरमान संग खयाल दिलाती है।


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कविता. ५९३९ किनारों पर आशाएं अक्सर।

                         किनारों पर आशाएं अक्सर। किनारों पर आशाएं अक्सर लहरों की कहानी देकर जाती है अरमानों को दास्तानों की पुकार कोशिश संग ...