Tuesday, 14 July 2026

कविता. ५९२९ इशारों की सुबह संग।

                            इशारों की सुबह संग।

इशारों की सुबह संग अदाओं से रोशनी तलाश दिलाती है एहसासों को जज्बातों की समझ पहचान दिलाती है।

इशारों की सुबह संग अरमानों से सरगम खयाल‌ दिलाती है अफसानों को कदमों की अल्फाज पहचान दिलाती है।

इशारों की सुबह संग धाराओं से पुकार दास्तान दिलाती है तरानों को बदलावों की सरगम पहचान दिलाती है।

इशारों की सुबह संग किनारों से अंदाज मुस्कान दिलाती है जज्बातों को उजालों की सुबह पहचान दिलाती है।

इशारों की सुबह संग नजारों से कोशिश अहमियत दिलाती है आशाओं को आवाजों की धून पहचान दिलाती है।

इशारों की सुबह संग अफसानों से उमंग तराना दिलाती है सपनों को आशाओं की महफिल पहचान दिलाती है।

इशारों की सुबह संग दास्तानों से आहट उम्मीद दिलाती है धाराओं को अंदाजों की मुस्कान पहचान दिलाती है।

इशारों की सुबह संग दिशाओं से परख‌ दास्तान दिलाती है लहरों को खयालों की सरगम पहचान दिलाती है।

इशारों की सुबह संग अंदाजों से सोच अफसाना दिलाती है राहों को अरमानों की सौगात पहचान दिलाती है।

इशारों की‌ सुबह संग जज्बातों से पुकार कोशिश दिलाती है कदमों को अल्फाजों की दुनिया पहचान दिलाती है।


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कविता. ५९२९ इशारों की सुबह संग।

                            इशारों की सुबह संग। इशारों की सुबह संग अदाओं से रोशनी तलाश दिलाती है एहसासों को जज्बातों की समझ पहचान दिलाती है।...