Thursday, 9 July 2026

कविता. ५९२४ किनारों की मुस्कान अक्सर।

                       किनारों की मुस्कान अक्सर।

किनारों की मुस्कान अक्सर अल्फाजों को उजाला देकर आगे बढती है एहसासों की धाराओं संग अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर दास्तानों को खयाल‌‌ देकर आगे बढती है उम्मीदों की आवाजों संग अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर तरानों को उमंग देकर आगे बढती है अफसानों की दिशाओं संग अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर जज्बातों को आवाज देकर आगे बढती है इशारों की खयालों संग अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर अंदाजों को रोशनी देकर आगे बढती है कदमों की आशाओं संग अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर बदलावों को धारा देकर आगे बढती है अदाओं की कदमों संग अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर नजारों को कोशिश देकर आगे बढती है अल्फाजों की जज्बातों संग‌ अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर सपनों को पहचान देकर आगे बढती है इरादों की सोच संग अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर दिशाओं को सुबह देकर आगे बढती है लहरों की कहानी संग अरमान जगाती रहती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर उम्मीदों को सोच देकर आगे बढती है बदलावों की पहचान संग अरमान जगाती रहती है।

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कविता. ५९२४ किनारों की मुस्कान अक्सर।

                       किनारों की मुस्कान अक्सर। किनारों की मुस्कान अक्सर अल्फाजों को उजाला देकर आगे बढती है एहसासों की धाराओं संग अरमान जगा...