Tuesday, 28 July 2026

कविता. ५९४३ हर पुकार को।

                                 हर पुकार को।

हर पुकार को उम्मीद तलाश दिलाती है उजालों को सपनों की आहट खयाल दिलाती है आशाओं को अंदाजों की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को आस आवाज दिलाती है जज्बातों को बदलावों की मुस्कान अंदाज दिलाती है धाराओं को नजारों की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को समझ इशारा दिलाती है अरमानों को लम्हों की कहानी सोच दिलाती है किनारों को सपनों की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को सोच कोशिश दिलाती है बदलावों को राहों की सरगम तलाश दिलाती है दास्तानों को खयालों की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को सुबह किनारा दिलाती है अदाओं को एहसासों की उमंग नजारा दिलाती है लहरों को दिशाओं की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को सरगम तराना दिलाती है अंदाजों को इशारों की सोच सहारा दिलाती है अफसानों को कदमों की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को लहर सोच दिलाती है दिशाओं को उम्मीदों की आहट सुबह दिलाती है तरानों को नजारों की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को परख उमंग दिलाती है राहों को किनारों की कोशिश एहसास दिलाती है अदाओं को आवाजों की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को सौगात लहर दिलाती है लहरों को अदाओं की रोशनी समझ दिलाती है इशारों को लम्हों की पहचान दिलाती है।

हर पुकार को सरगम तराना दिलाती है कदमों को अरमानों की कहानी अफसाना दिलाती है उजालों को अंदाजों की पहचान दिलाती है।

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कविता. ५९४५ हर आवाज संग एहसासों की।

                      हर आवाज संग एहसासों की। हर आवाज संग एहसासों की समझ तलाश दिलाती है दास्तानों को नजारों की सोच सहारा दिलाती है कदमों को ...