Wednesday, 15 July 2026

कविता. ५९३० दास्तान एक।

                                  दास्तान एक।

दास्तान एक कहानी सुनाती है लम्हों को अल्फाजों की मुस्कान उजाला देकर जाती है अरमानों को तरानों की दुनिया सरगम सुनाती है।

दास्तान एक उमंग सुनाती है तरानों को एहसासों की उम्मीद कोशिश देकर जाती है खयालों को सपनों की आस सरगम सुनाती है।

दास्तान एक आवाज सुनाती है कदमों को धाराओं की सोच बदलाव देकर जाती है दिशाओं को अंदाजों की पुकार सरगम सुनाती है।

दास्तान एक पहचान सुनाती है लहरों को खयालों की सुबह इशारा देकर जाती है आशाओं को किनारों की तलाश सरगम सुनाती है।

दास्तान एक सपना सुनाती है राहों को उजालों की परख समझ देकर जाती है आवाजों को इरादों की कोशिश सरगम सुनाती है।

दास्तान एक अंदाज सुनाती है नजारों को दिशाओं की रोशनी एहसास देकर जाती है धाराओं को उम्मीदों की सोच सरगम सुनाती है।

दास्तान एक इशारा सुनाती है किनारों को अदाओं की धून नजारा देकर जाती है जज्बातों को बदलावों की पुकार सरगम सुनाती है।

दास्तान एक तराना सुनाती है आशाओं को अल्फाजों की दुनिया सोच देकर जाती है अंदाजों को दिशाओं की महफिल सरगम सुनाती है।

दास्तान एक कोशिश सुनाती है जज्बातों को अदाओं की आवाज उजाला देकर जाती है एहसासों को इशारों की समझ सरगम सुनाती है।

दास्तान एक बदलाव सुनाती है‌ इरादों को सपनों की पहचान तलाश देकर जाती है धाराओं को उम्मीदों की परख सरगम सुनाती है।


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कविता. ५९३० दास्तान एक।

                                  दास्तान एक। दास्तान एक कहानी सुनाती है लम्हों को अल्फाजों की मुस्कान उजाला देकर जाती है अरमानों को तरानों ...