Thursday, 16 July 2026

कविता. ५९३१ किनारों पर आशाएं अक्सर।

                            किनारों पर आशाएं अक्सर।

किनारों पर आशाएं अक्सर तराना सुनाती है लम्हों को अल्फाजों की दिशाएं अलग मुस्कान का बहाना सुनाकर आगे बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर उम्मीद सुनाती है तरानों को नजारों की दुनिया अलग पहचान का इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर सरगम सुनाती है राहों को तरानों की अहमियत अलग रोशनी का उजाला सुनाकर आगे बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर लहर सुनाती है कदमों को अरमानों की सोच अलग राह का तराना सुनाकर आगे बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर अंदाज सुनाती है दिशाओं को जज्बातों की पुकार अलग सोच का एहसास सुनाकर बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर खयाल सुनाती है नजारों को अदाओं की सरगम अलग तलाश का अफसाना सुनाकर बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर कोशिश सुनाती है उजालों को अरमानों की उम्मीद अलग बदलाव का सौगात सुनाकर बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर आवाज सुनाती है इशारों को लहरों की कहानी अलग जज्बात का पुकार सुनाकर बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर अरमान सुनाती है धाराओं को कदमों की सोच अलग पहचान का तराना सुनाकर बढती जाती है।

किनारों पर आशाएं अक्सर सपना सुनाती है आवाजों को धाराओं की अहमियत अलग परख का आस सुनाकर बढती जाती है।

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कविता. ५९३१ किनारों पर आशाएं अक्सर।

                             किनारों पर आशाएं अक्सर। किनारों पर आशाएं अक्सर तराना सुनाती है लम्हों को अल्फाजों की दिशाएं अलग मुस्कान का बहान...