Wednesday, 22 July 2026

कविता. ५९३७ उजालों की सुबह अक्सर।

                          उजालों की सुबह अक्सर।

उजालों की सुबह अक्सर आशाओं से पुकार दिलाती है एहसासों को जज्बातों की समझ कोशिश दिलाती है तरानों को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर दिशाओं से सरगम दिलाती है कदमों को अल्फाजों की दुनिया तलाश दिलाती है लहरों को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर किनारों से अरमान दिलाती है अदाओं को नजारों की आस रोशनी दिलाती है राहों को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर लम्हों से नजारा दिलाती है खयालों को सपनों की आहट उमंग दिलाती है अंदाजों को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर दास्तानों से किनारा दिलाती है उम्मीदों को इशारों की पुकार आवाज दिलाती है तरानों को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर जज्बातों से आस दिलाती है अफसानों को कदमों की सौगात बदलाव दिलाती है इरादों को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर राहों से मुस्कान दिलाती है दिशाओं को लहरों की कहानी सरगम दिलाती है कदमों को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर इरादों से तलाश दिलाती है किनारों को अरमानों की सोच अंदाज दिलाती है दिशाओं को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर धाराओं से अहमियत दिलाती है उम्मीदों को तरानों की पुकार मुस्कान दिलाती है इशारों को पहचान दिलाती है।

उजालों की सुबह अक्सर जज्बातों से आवाज दिलाती है अल्फाजों को खयालों की रोशनी उमंग दिलाती है सपनों को पहचान दिलाती है।

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कविता. ५९३७ उजालों की सुबह अक्सर।

                          उजालों की सुबह अक्सर। उजालों की सुबह अक्सर आशाओं से पुकार दिलाती है एहसासों को जज्बातों की समझ कोशिश दिलाती है तरा...