Sunday, 27 March 2016

कविता ५८२. दिशाए बदलते रहना

                                          दिशाए बदलते रहना
बार बार जीवन कि दिशाए बदल लेना सही सोच नही है कभी रुकने कि जरुरत है हमे आगे बढने कि इतनी जल्दी नही है
जो बाते हम दोहराते है उन्हे परख लेने कि जरुरत है बार बार किसी बात को कहते रहना जीवन का सही अंदाज नही है
पर दो पल मे बदल जाना यह सोच भी सीधी नही है जो हमे अलग अलग एहसास दिखाये वह सोच समझ लेने कि जरुरत होती ही है
पर जब जब हम जीवन मे सोचे जीवन कि धारा अलग अलग दिशाओं मे बहती रही है हमे जीवन मे रोशनी नयी नयी राहे देती है
कोई दिशा सही है तो कोई दिशा गलत भी दिखती रही है दिशाओं को बदलते रहनेसे जीवन कि दुनिया कुछ बनती नयी है
पर सिर्फ दिशाए बदलती रही तो भी जीवन मे बनती उलझन नयी है जिन्हे समझ लेना है वह दिशाए कई बार समझे बगैर उम्मीदे देती नही है
बदलाव तो जीवन कि कहानी है जो हर पल जीवन को रोशनी देती है जिसे समझ लेने कि जरुरत जीवन मे हर पल होती ही है
बदलते रहने कि भी जरुरत हर बार जीवन मे होती है जिसे समझ लेने से ही दुनिया खुबसूरत हर बार हर मोड पर बनती है
हमे कभी दिशाए बदल लेनी पडती है तो कभी दिशाए वही रखनी पडती है दिशाओं मे ही हमारी दुनिया बनती है खुशियाँ मिलती है
हमे दुनिया समझ लेनी पडती है जो हमे खुबसूरती का नया मतलब दे जाती है जो हमारी दुनिया को सही रंग दे कर खुशियाँ दे जाती है

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