Saturday, 5 March 2016

कविता ५४१. मन पर लिखी बाते

                                      मन पर लिखी बाते
हर लहर पे जब किसी का नाम लिख देते है तो मन मे लिखे नाम कि तरह लोग कहाँ उसे मिटा पाते है वह नाम बस वही रह जाते है
जो चीजे हम अपने के ताकद से कर देते है उन्हे हम जीवन मे कहाँ बदल पाते है जीवन कि धारा मे ही तो उन्हे हम मजबूती से पकड पाते है
जो बाते मन से होती है उन्हे समझ लेने कि दुनिया मे हर बार जरुरत होती है लहर पे लिखी बाते मन को ताकद दे जाती है जीवन कि राहों को बदल देती है
क्योंकि रेत पर लिखी बाते तो मिट पाती है वह बाते कहाँ ताकद रख पाती है वह बाते जो पानी कि लहरों पर ही जीवन कि कहानी बताती है वह सिर्फ मन से लिखी जाती है
जीवन मे जो कहानी मन से लिखी हो वही तो हमे आगे ले कर जाती है जीवन को असली ताकद और रोशनी दे कर ही तो आगे बढ जाती है
जीवन के हर एक छोर पर कोई अलग कहानी दिखती है क्योंकि वह असल मे हो या न हो वह मन कि दुनिया बनाती है वही तो दुनिया कि असली ताकद होती है
मन कि ताकद ही तो पानी पर कुछ बाते कह जाती है क्योंकि वह बाते मन मे कही मजबूती से कर जाती है जो जीवन पर असर कर जाती है
रेत पे लिखी चीजे जो जीवन मे खो जाती है वही हमारी दुनिया हर बार बदल कर आगे चली जाती है जो बाते हम जीवन मे लिखते है वह अलग अलग असर करती जाती है
रेत पर लिखी बाते तो जीवन कि धारा को मतलब दे जाती है पानी पर लिखी बाते तो सिर्फ मन कि ताकद और कहानी को सुनाती है
पानी पर लिखी बाते मन कि लिखावट होती है रेत पर लिखी एक बात आँखों को तो दिखती है पर लहर के संग मिट जाती है
पर मन पे लिखी बाते दुनिया को बदल जाती है जीवन कि कहानी को अलग रंग दे कर हर बार आगे बढती जाती है दुनिया को मतलब दे कर आगे ले जाती है

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