Wednesday, 28 December 2022

कविता. ४६६९. उम्मीद किसी किनारे संग।

                                उम्मीद किसी किनारे संग।

उम्मीद किसी किनारे संग आशाओं कि महफ़िल देती है कदमों कि सोच अक्सर आवाजों कि सरगम देती है अंदाजों को बदलावों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग जज्बातों कि सौगात देती है तरानों कि सुबह अक्सर अरमानों कि पुकार देती है खयालों को अंदाजों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग दास्तानों कि आहट देती है अरमानों कि आहट अक्सर सपनों कि तलाश देती है नजारों को अल्फाजों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग अंदाजों कि समझ देती है आवाजों कि सरगम अक्सर बदलावों कि सोच देती है दिशाओं को कदमों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग अदाओं कि रोशनी देती है नजारों कि सोच अक्सर अफसानों कि सुबह देती है उजालों को सपनों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग तरानों कि आस देती है कदमों कि राह अक्सर खयालों कि मुस्कान देती है अरमानों को नजारों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग दिशाओं कि लहर देती है खयालों कि उमंग अक्सर लहरों कि आवाज देती है अफसानों को राहों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग आवाजों कि समझ देती है अरमानों कि सुबह अक्सर आशाओं कि सोच देती है तरानों को उजालों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग नजारों कि सुबह देती है तरानों कि पुकार अक्सर इशारों कि रोशनी देती है अंदाजों को बदलावों कि कोशिश देती है।

उम्मीद किसी किनारे संग लम्हों कि पुकार देती है अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर इरादों कि सौगात देती है अफसानों को राहों कि कोशिश देती है।

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