Friday, 12 June 2026

कविता. ५९०१ सपनों की सुबह संग।

 

                           सपनों की सुबह संग।

सपनों की सुबह संग अरमानों से आवाज सुनाती है दिशाओं को लम्हों की कहानी अफसाना दिलाती है तरानों की सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग जज्बातों से कोशिश सुनाती है लहरों को कदमों की सौगात इरादा दिलाती है अंदाजों की सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग आशाओं से पहचान सुनाती है किनारों को अंदाजों की पुकार मुस्कान दिलाती है धाराओं की सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग एहसासों से परख सुनाती है खयालों को नजारों की समझ कोशिश दिलाती है दास्तानों की सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग किनारों से बदलाव दिलाती है अल्फाजों को राहों की अहमियत उमंग दिलाती है आशाओं की सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग कदमों से आस दिलाती है लम्हों को एहसासों की सोच पहचान दिलाती है खयालों की सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग बदलावों से रोशनी दिलाती है धाराओं को उम्मीदों की परख अल्फाज दिलाती है राहों की‌ सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग नजारों से मुस्कान दिलाती है अरमानों को उजालों की सुबह किनारा दिलाती है उम्मीदों की सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग दास्तानों से उम्मीद दिलाती है आशाओं को इशारों की लहर तलाश दिलाती है किनारों की सरगम दिलाती है।

सपनों की सुबह संग अदाओं से तलाश दिलाती है इरादों को अफसानों की आस रोशनी दिलाती है लहरों की सरगम दिलाती है।


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