Wednesday, 17 June 2026

कविता. ५९०६ कदमों की सौगात संग।

 

                        कदमों की सौगात संग।

कदमों की सौगात संग आशाओं से तराना मुस्कान दिलाता है जज्बातों को बदलावों की आस अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग धाराओं से इशारा उजाला दिलाता है अरमानों को लम्हों की कहानी अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग नजारों से पुकार लहर दिलाता है एहसासों को किनारों की अहमियत अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग राहों से पहचान अंदाज दिलाता है इरादों को अल्फाजों की रोशनी अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग जज्बातों से उमंग दास्तान दिलाता है आवाजों को धाराओं की समझ अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग उजालों से सपना तलाश दिलाता है तरानों को लहरों की कोशिश अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग दिशाओं से इरादा पहचान दिलाता है उम्मीदों को एहसासों की सुबह अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग अदाओं से‌ एहसास सोच दिलाता है खयालों को किनारों की आवाज अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग दास्तानों से अंदाज इरादा दिलाता है धाराओं को जज्बातों की कोशिश अफसाना सुनाती है।

कदमों की सौगात संग लहरों से बदलाव तलाश दिलाता है उजालों को आशाओं की महफिल अफसाना सुनाती है।


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कविता. ५९०६ कदमों की सौगात संग।

                          कदमों की सौगात संग। कदमों की सौगात संग आशाओं से तराना मुस्कान दिलाता है जज्बातों को बदलावों की आस अफसाना सुनाती है...