Saturday, 27 June 2026

कविता. ५९१६ कदमों की मुस्कान से।

 

                            कदमों की मुस्कान से।

कदमों की मुस्कान से एहसास सुनाती है उजालों को लम्हों की पहचान अलग कहानी दिलाती है इशारों को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से आवाज सुनाती है तरानों को बदलावों की आस अलग पहचान दिलाती है राहों को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से उम्मीद सुनाती है लहरों को तरानों की सरगम अलग कोशिश दिलाती है धाराओं को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से पुकार सुनाती है अल्फाजों को किनारों की राह अलग अंदाज दिलाती है आवाजों को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से अफसाना सुनाती है अदाओं को अरमानों की सोच अलग लहर दिलाती है धाराओं को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से परख सुनाती है नजारों को बदलावों की सुबह अलग सपना दिलाती है कदमों को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से सरगम सुनाती है आशाओं को अंदाजों की रोशनी अलग अहमियत दिलाती है इरादों को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से सौगात सुनाती है जज्बातों को दिशाओं की महफिल अलग नजारा दिलाती है एहसासों को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से आस सुनाती है अरमानों को लम्हों की कहानी अलग उमंग दिलाती है अफसानों को तलाश देकर जाती है।

कदमों की मुस्कान से तराना सुनाती है अंदाजों को सपनों की आहट अलग जज्बात दिलाती है उम्मीदों को तलाश देकर जाती है।


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कविता. ५९१६ कदमों की मुस्कान से।

                              कदमों की मुस्कान से। कदमों की मुस्कान से एहसास सुनाती है उजालों को लम्हों की पहचान अलग कहानी दिलाती है इशारों ...