Wednesday, 10 June 2026

कविता ५८९९. किनारों से आशाओं की।

                            किनारों से आशाओं की।

किनारों से आशाओं की लहर एहसास दिलाती है लम्हों को दास्तानों की समझ अल्फाज सुनाती है दिशाओं की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की कहानी तलाश दिलाती है जज्बातों को बदलावों की आस मुस्कान सुनाती है कदमों की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की उम्मीद रोशनी दिलाती है एहसासों को उजालों की सुबह उमंग सुनाती है अंदाजों की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की आवाज खयाल दिलाती है राहों को अरमानों की सोच पुकार सुनाती है अदाओं की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की अहमियत जज्बात दिलाती है‌ अफसानों को लहरों की पहचान समझ सुनाती है धाराओं की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की उमंग सरगम दिलाती है खयालों को नजारों की आहट सौगात सुनाती है राहों की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की कोशिश आस दिलाती है अल्फाजों को तरानों की आवाज परख सुनाती है नजारों की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की सोच अफसाना दिलाती है अदाओं को बदलावों की सरगम तलाश सुनाती है इशारों की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की सौगात इरादा दिलाती है तरानों को एहसासों की पुकार आहट सुनाती है धाराओं की महफिल दिलाती है।

किनारों से आशाओं की कहानी अंदाज दिलाती है दिशाओं को उम्मीदों की पहचान आस सुनाती है अरमानों की महफिल दिलाती है।

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कविता ५८९९. किनारों से आशाओं की।

                            किनारों से आशाओं की। किनारों से आशाओं की लहर एहसास दिलाती है लम्हों को दास्तानों की समझ अल्फाज सुनाती है दिशाओं ...