Sunday, 7 June 2026

कविता. ५८९६ हर पुकार संग आशाओं की।

 

                           हर पुकार संग आशाओं की।

हर पुकार संग आशाओं की कहानी समझ दिलाती है लहरों को सपनों की सौगात तलाश दिलाती है कदमों की आस दिलाती है।

हर पुकार संग आशाओं की उमंग अल्फाज दिलाती है तरानों को बदलावों की सोच कोशिश दिलाती है दास्तानों की आस दिलाती है।

हर पुकार संग आशाओं की परख मुस्कान दिलाती है नजारों को लम्हों की महफिल सरगम दिलाती है इशारों की आस दिलाती है।

हर पुकार संग आशाओं की आवाज सरगम दिलाती है अंदाजों को किनारों की पहचान अरमान दिलाती है उजालों की आस दिलाती है।

हर पुकार संग आशाओं की अंदाज जज्बात दिलाती है धाराओं को उम्मीदों की सुबह खयाल दिलाती है किनारों की आस दिलाती है।

हर पुकार संग आशाओं की सोच अफसाना दिलाती है अदाओं को धाराओं की रोशनी नजारा दिलाती है दिशाओं की आस दिलाती है।

हर पुकार संग आशाओं की समझ अंदाज दिलाती है इरादों को अफसानों की सोच एहसास दिलाती है खयालों की आस दिलाती है।

हर‌ पुकार संग आशाओं की आहट इरादा दिलाती है राहों को अरमानों की समझ पुकार दिलाती है उम्मीदों की आस दिलाती है।

हर पुकार संग आशाओं की पहचान अरमान दिलाती है नजारों को अदाओं की आहट सुबह दिलाती है जज्बातों की आस दिलाती है।

हर पुकार संग आशाओं की रोशनी लम्हा दिलाती है दिशाओं को अंदाजों की महफिल नजारा दिलाती है इरादों की आस दिलाती है।

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