Thursday, 25 June 2026

कविता. ५९१४ दिशाओं से सुबह संग।

 

                          दिशाओं से सुबह संग।

दिशाओं से सुबह संग अरमानों की कोशिश दिलाती है उजालों को आशाओं की तलाश दास्तान सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग उम्मीदों की सौगात दिलाती है तरानों को बदलावों की मुस्कान अफसाना सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग राहों की पहचान दिलाती है किनारों को अंदाजों की आहट इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग अदाओं की पुकार दिलाती है इरादों को एहसासों की उमंग जज्बात सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग अल्फाजों की सोच दिलाती है लहरों को धाराओं की समझ आवाज सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग दास्तानों की तलाश दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की दुनिया रोशनी सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग तरानों की सरगम दिलाती है खयालों को सपनों की परख अंदाज सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग धाराओं की उमंग दिलाती है तरानों को अफसानों की सोच एहसास सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग आशाओं की उम्मीद दिलाती है नजारों को बदलावों की आस सपना सुनाकर आगे बढती जाती है।

दिशाओं से सुबह संग आवाजों की धून दिलाती है उम्मीदों को तरानों की सरगम समझ सुनाकर आगे बढती जाती है।


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कविता. ५९१४ दिशाओं से सुबह संग।

                            दिशाओं से सुबह संग। दिशाओं से सुबह संग अरमानों की कोशिश दिलाती है उजालों को आशाओं की तलाश दास्तान सुनाकर आगे बढत...