Thursday, 11 June 2026

कविता. ५९०० नजारों की कोई कहानी।

 

                        नजारों की कोई कहानी।

नजारों की कोई कहानी मुस्कान सुनाती है एहसासों को लम्हों की कोशिश खयाल दिलाती है इशारों की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी उमंग सुनाती है अरमानों को दास्तानों की समझ सरगम दिलाती है अल्फाजों की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी कोशिश सुनाती है धाराओं को खयालों की पहचान जज्बात दिलाती है सपनों की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी आवाज सुनाती है लहरों को दिशाओं की महफिल परख दिलाती है आशाओं की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी दास्तान सुनाती है राहों को इशारों की सोच बदलाव दिलाती है किनारों की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी उम्मीद सुनाती है अंदाजों को अफसानों की आस पुकार दिलाती है उजालों की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी अल्फाज सुनाती है कदमों को सपनों की सौगात तराना दिलाती है आवाजों की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी आस सुनाती है दास्तानों को बदलावों की सुबह अंदाज दिलाती है जज्बातों की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी पुकार सुनाती है उजालों को इरादों की समझ रोशनी दिलाती है कदमों की आहट देकर जाती है।

नजारों की कोई कहानी अफसाना सुनाती है जज्बातों को आशाओं की सरगम दास्तान दिलाती है लहरों की आहट देकर जाती है।

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कविता. ५९०० नजारों की कोई कहानी।

                          नजारों की कोई कहानी। नजारों की कोई कहानी मुस्कान सुनाती है एहसासों को लम्हों की कोशिश खयाल दिलाती है इशारों की आहट...