Tuesday, 2 June 2026

कविता. ५८९१ किसी किनारे की आहट संग।

 

                      किसी किनारे की आहट संग।

किसी किनारे की आहट संग आशाओं की महफिल तलाश दिलाती है लहरों को जज्बातों की रोशनी पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग तरानों की सरगम दास्तान दिलाती है सपनों को अंदाजों की पुकार पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग एहसासों की समझ इशारा दिलाती है खयालों को नजारों की कोशिश पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग कदमों की सौगात आवाज दिलाती है उजालों को अरमानों की आस पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग अदाओं की परख कोशिश दिलाती है उम्मीदों को दास्तानों की सुबह पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग राहों की रोशनी अल्फाज दिलाती है इशारों को आवाजों की कहानी पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग नजारों की कोशिश उमंग दिलाती है अफसानों को दिशाओं की महफिल पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग धाराओं की आस अफसाना दिलाती है कदमों को इरादों की कहानी पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग अरमानों की दुनिया बदलाव दिलाती है नजारों को लम्हों की अहमियत पहचान दिलाती है।

किसी किनारे की आहट संग दास्तानों की कोशिश सौगात दिलाती है एहसासों को खयालों की सोच पहचान दिलाती है।

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कविता. ५८९१ किसी किनारे की आहट संग।

                        किसी किनारे की आहट संग। किसी किनारे की आहट संग आशाओं की महफिल तलाश दिलाती है लहरों को जज्बातों की रोशनी पहचान दिलाती...