Monday, 22 June 2026

कविता. ५९११ अल्फाज की महफिल अक्सर।

 

                   अल्फाज की महफिल अक्सर।

अल्फाज की महफिल अक्सर खयालों की सरगम सुनाती है इशारों से तलाश जुडकर अक्सर दास्तानों की राह उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर कदमों की सौगात सुनाती है अंदाजों से आवाज जुडकर अक्सर नजारों की समझ उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर दिशाओं की कहानी सुनाती है दिशाओं से अहमियत जुडकर अक्सर जज्बातों की आस उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर राहों की समझ सुनाती है अफसानों से सोच जुडकर अक्सर दास्तानों की पहचान उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर किनारों की मुस्कान सुनाती है अरमानों से उमंग जुडकर अक्सर जज्बातों की आहट उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर लहरों की सोच सुनाती है बदलावों से पुकार जुडकर अक्सर धाराओं की कोशिश उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर आशाओं की सुबह सुनाती है तरानों से आस जुडकर अक्सर अंदाजों की रोशनी उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर एहसासों की पुकार सुनाती है उजालों से सपना जुडकर अक्सर अरमानों की सोच उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर लम्हों की तलाश सुनाती है खयालों से समझ जुडकर अक्सर किनारों की राह उम्मीद सुनाती है।

अल्फाज की महफिल अक्सर अंदाजों की पहचान सुनाती है नजारों से आवाज जुडकर अक्सर दिशाओं की कहानी उम्मीद सुनाती है।


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कविता. ५९११ अल्फाज की महफिल अक्सर।

                     अल्फाज की महफिल अक्सर। अल्फाज की महफिल अक्सर खयालों की सरगम सुनाती है इशारों से तलाश जुडकर अक्सर दास्तानों की राह उम्मी...