Monday, 8 June 2026

कविता. ५८९७ ‌ उजालों की आहट संग।

 

                       उजालों की आहट संग।

उजालों की आहट संग धाराओं से पहचान तलाश दिलाती है अरमानों को लम्हों की कहानी आस दिलाती है इरादों की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट संग लहरों से कोशिश खयाल दिलाती है बदलावों को उम्मीदों की सोच दिलाती है जज्बातों की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट संग अंदाजों से सरगम पुकार दिलाती है दास्तानों को तरानों की समझ दिलाती है अरमानों की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट संग दिशाओं से सोच परख दिलाती है अफसानों को कदमों की आस अल्फाज दिलाती है राहों की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट संग किनारों से आस अंदाज दिलाती है खयालों को सपनों की उम्मीद लहर दिलाती है नजारों की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट संग आशाओं से अदा एहसास दिलाती है अदाओं को एहसासों की पुकार तलाश दिलाती है सपनों की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट संग कदमों से आवाज उमंग दिलाती है किनारों को अंदाजों की पहचान इशारा दिलाती है लहरों की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट संग अल्फाजों से रोशनी सोच दिलाती है एहसासों को धाराओं की कोशिश राह दिलाती है इशारों की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट अक्सर दास्तानों से समझ अल्फाज दिलाती है तरानों को राहों की मुस्कान नजारा दिलाती है आशाओं की सुबह दिलाती है।

उजालों की आहट अक्सर अरमानों से‌ सौगात लहर दिलाती है आशाओं को तरानों की सरगम इरादा दिलाती है बदलावों की सुबह दिलाती है।

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कविता. ५८९८. आवाज की धूम अक्सर।

                       आवाज की धून अक्सर। आवाज की धून अक्सर इशारों को तलाश दिलाती है अदाओं संग कोशिश से दिशाएं सपना दिलाती है कदमों की‌‌ आहट...