Sunday, 14 June 2026

कविता. ५९०३ इशारों की आहट अक्सर।

 

                        इशारों की आहट संग।

इशारों की आहट संग दास्तानों से उम्मीद जज्बात दिलाती है अरमानों को लम्हों की कहानी कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग तरानों से मुस्कान खयाल दिलाती है लहरों को बदलावों की पुकार कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग अल्फाजों से रोशनी सरगम दिलाती है सपनों को अंदाजों की सोच कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग उजालों से अहमियत सुबह दिलाती है जज्बातों को दिशाओं की महफिल कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग राहों से आवाज पहचान दिलाती है किनारों को एहसासों की सुबह कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग कदमों से तलाश बदलाव दिलाती है नजारों को दास्तानों की सौगात कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग आशाओं से उमंग खयाल‌ दिलाती है अदाओं को धाराओं की पहचान कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग अफसानों से आस तराना दिलाती है उम्मीदों को आवाजों की धून कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग लहरों से मुस्कान सरगम दिलाती है एहसासों को उजालों की राह कोशिश देकर आगे बढती है।

इशारों की आहट संग सपनों से सौगात अंदाज दिलाती है अफसानों को कदमों की सरगम कोशिश देकर आगे बढती है।

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कविता. ५९०७ दिशाओं की महफिल अक्सर।

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