Wednesday, 22 March 2023

कविता. ४७५३. उजाला किसी।

                                        उजाला किसी।

उजाला किसी इशारे संग एहसास जगाता जाता है कदमों को अदाओं कि कोशिश से उम्मीद दिलाता जाता है किनारों को अल्फाजों कि मुस्कान दिलाता जाता है।

उजाला किसी इरादे संग अरमान जगाता जाता है किनारों को सपनों कि लहर से तलाश दिलाता जाता है अफसानों को राहों कि कोशिश दिलाता जाता है।

उजाला किसी तराने संग आस जगाता जाता है नजारों को दिशाओं कि कहानी से खयाल दिलाता जाता है अल्फाजों को तरानों कि सुबह दिलाता जाता है।

उजाला किसी किनारे संग आवाज जगाता जाता है एहसासों को उम्मीदों कि समझ से अंदाज दिलाता जाता है अदाओं को दिशाओं कि तलाश दिलाता जाता है।

उजाला किसी नजारे संग अफसाना जगाता जाता है अंदाजों को बदलावों कि सौगात से अल्फाज दिलाता जाता है जज्बातों को आशाओं कि सरगम दिलाता जाता है।

उजाला किसी लहरों संग अल्फाज जगाता जाता है खयालों को अंदाजों कि परख से पहचान दिलाता जाता है एहसासों को अदाओं कि पुकार दिलाता जाता है।

उजाला किसी लम्हे संग कोशिश जगाता जाता है कदमों को अदाओं कि सौगात से दास्तान दिलाता जाता है बदलावों को दिशाओं कि कहानी दिलाता जाता है।

उजाला किसी अफसाने संग सुबह जगाता जाता है जज्बातों को कदमों कि आहट से अरमान दिलाता जाता है आवाजों को राहों कि मुस्कान दिलाता जाता है।

उजाला किसी सपने संग रोशनी जगाता जाता है आशाओं को खयालों कि सोच से एहसास दिलाता जाता है अंदाजों को अरमानों कि सुबह दिलाता जाता है।

उजाला किसी अफसाने संग राह जगाता जाता है अदाओं को तरानों कि पहचान से आवाज दिलाता जाता है कदमों को अदाओं कि कोशिश दिलाता जाता है।

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