Friday, 26 September 2025

कविता. ५६४२. राहों को दास्तानों की।

                           राहों को दास्तानों की।

राहों को दास्तानों की पहचान इरादा देकर जाती है अरमानों की सोच अक्सर अल्फाज सुनाती है आशाओं की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की धून उजाला देकर जाती है अंदाजों की रोशनी अक्सर सरगम सुनाती है कदमों की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की समझ पुकार देकर जाती है खयालों की कोशिश अक्सर जज्बात सुनाती है अरमानों की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की आवाज अफसाना देकर जाती है दिशाओं की महफिल अक्सर तलाश सुनाती है तरानों की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की आस बदलाव देकर जाती है किनारों की आहट अक्सर सौगात सुनाती है इरादों की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की तलाश उमंग देकर जाती है उम्मीदों की आस अक्सर कहानी सुनाती है अदाओं की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की उम्मीद कोशिश देकर जाती है लहरों की सुबह अक्सर परख सुनाती है एहसासों की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की अहमियत तराना देकर जाती है उजालों की सौगात अक्सर अंदाज सुनाती है किनारों की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की सोच बदलाव देकर जाती है अल्फाजों की दुनिया अक्सर अरमान सुनाती है धाराओं की मुस्कान दिलाती है।

राहों को दास्तानों की रोशनी अफसाना देकर जाती है खयालों की अहमियत अक्सर कोशिश सुनाती है उम्मीदों की मुस्कान दिलाती है।

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