Saturday, 11 October 2025

कविता. ५६५७. आशाओं की आवाज संग।

                        आशाओं की आवाज संग।

आशाओं की आवाज संग अफसानों की पुकार तराना सुनाती है लम्हों को जज्बातों की रोशनी सरगम सुनाती है राहों की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग खयालों की महफिल सपना सुनाती है एहसासों को किनारों की सुबह तलाश सुनाती है दास्तानों की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग लहरों की कहानी उजाला सुनाती है अंदाजों को नजारों की अहमियत इशारा सुनाती है कदमों की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग अल्फाजों की उमंग खयाल सुनाती है लहरों को दिशाओं की समझ पहचान सुनाती है इरादों की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग जज्बातों की राह बदलाव सुनाती है किनारों को अरमानों की कोशिश पुकार सुनाती है खयालों की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग उजालों की परख सोच सुनाती है बदलावों को राहों की महफिल सरगम सुनाती है दिशाओं की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग एहसासों की तलाश अरमान सुनाती है नजारों को लम्हों की कहानी आस सुनाती है तरानों की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग लहरों की पहचान उम्मीद सुनाती है कदमों को अदाओं की आहट जज्बात सुनाती है लम्हों की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग किनारों की समझ सौगात सुनाती है इशारों को दास्तानों की महफिल पहचान सुनाती है लहरों की मुस्कान सुनाती है।

आशाओं की आवाज संग अरमानों की आस पुकार सुनाती है अल्फाजों को कदमों की आहट कोशिश सुनाती है अफसानों की मुस्कान सुनाती है।

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