Wednesday, 2 September 2026

कविता. ५९६९ उमंग को रोशनी अक्सर।

                          उमंग को रोशनी अक्सर।

उमंग को रोशनी अक्सर एहसास सुनाती है इशारों को जज्बातों की तलाश अफसाना दिलाती है नजारों को खयाल दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर पहचान सुनाती है कदमों को उजालों की सुबह तराना दिलाती है अफसानों को खयाल‌ दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर जज्बात सुनाती है आशाओं को अंदाजों की सरगम आस दिलाती है सपनों को खयाल दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर कोशिश सुनाती है दिशाओं को लहरों की पुकार कहानी दिलाती है उजालों को खयाल दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर तलाश सुनाती है राहों को धाराओं की समझ मुस्कान दिलाती है लम्हों को खयाल दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर अफसाना सुनाती है धाराओं को कदमों की पुकार सोच दिलाती है अरमानों को खयाल दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर अंदाज सुनाती है उम्मीदों को अल्फाजों की आवाज अरमान दिलाती है इरादों को खयाल दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर कोशिश सुनाती है तरानों को अरमानों की सौगात आहट दिलाती है किनारों को खयाल दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर आवाज सुनाती है बदलावों को उजालों की कहानी परख दिलाती है दास्तानों को खयाल दिलाती है।

उमंग को रोशनी अक्सर लहर सुनाती है एहसासों को लम्हों की कोशिश अहमियत दिलाती है बदलावों को खयाल दिलाती है।



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कविता. ५९६९ उमंग को रोशनी अक्सर।

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