Thursday, 29 October 2015

कविता २८५. कुछ उम्मीद

                                               कुछ उम्मीद
कुछ उम्मीद जो जीवन मे जिन्दा रखनी होती है उसे समजे तो जीवन कि रोशनी समज लेनी है जिसे हर पल आगे ले जाए वह उम्मीद तो समज लेनी है
उम्मीदों के अंदर हर बार दुनिया और ख़ुशियाँ चुपके से परख लेनी है जब हम आगे बढ़ जाए तो दुनिया भी तो समज लेनी है जिसके अंदर हर बार जीवन कि उम्मीद होती है
वह सारी उम्मीदें जो जीवन को नये तरीक़े से जीवन को रोशनी दे जाती है उम्मीदों का मतलब बडा अलग होता है जिसके बजह से जीवन मे उम्मीदें आ जाती है
उम्मीद तो वह सोच दे जाती है जो जीवन पर अलग असर कर जाती है उम्मीद तो जीवन को अलग असर दे जाती है पर कभी कभी उम्मीद पीछे ले जाती है
उम्मीद जिसे समज लेना जीवन को आसानी से आता है उसे परख लेना उम्मीदें दे जाता है उम्मीद जो मतलब हर बार जीवन को दे जाती है उसे समज लेने से जीवन पर असर कर जाती है
उम्मीदें जो जीवन पर अलग असर कर जाती है उम्मीदें तो रोशनी हर बार जीवन मे दे जाती है उन्हीं उम्मीदों से जीवन के अलग मतलब हर बार दिखते रहते है
उम्मीद तो वह आस है जो हमे हर बार रोशनी दे जाती है पर कभी हमे उम्मीदें आगे ले जाती है उन्हीं के अंदर नई सोच जीवन पर सही असर हर बार हो जाता है
उम्मीद जो जीवन को सच्ची रोशनी दे जाती है हमे वह सोच देते है उम्मीद के अंदर नई सोच जो हम पर असर कर जाती है उम्मीद तो रोशनी हर बार ले आती है
जिसे परख लेने से ही तो जीवन मे आगे बढ़ जाते क्योंकि वही तो जीवन मे सही दिशा लाते उम्मीदों को थामो जिन्दगी मिल जाती है उन्हीं रोशनी कि नई किरण आती है
तो आँख मुदकर मत चलो पर अपनी उम्मीदों पर भरोसा कर के चलो उनसे ही तो जीवन मे जीने कि रोशनी हर बार आती है क्योंकि उम्मीदें जीवन पर असर कर जाती है

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