Wednesday, 2 December 2015

कविता ३५३. रात में उजियाला

                                                          रात में उजियाला
रात में भी उजियाला जो जीवन को दे जाते है वह खयाल रोशनी जो दे जाता है उन खयालों को समज लेना हर बार जरुरी होता है उन खयाल को परख लेना अहम होता है
रात से भी ज्यादा जीवन का मतलब उस पल के ख़याल में होता है जीवन के सोच में नया मतलब जो जीवन को उजाला देता है
क्योंकि जीवन को उस पल मे उजाला मिलता है
जिसे समज लेना हर बार जीवन मे एहसास अलगसा देता है कुछ सोच मे जीवन के अंदर उजियाला दे जाती है रात के अंदर अलग रोशनी आती है जो सोच हमे दे जाती है
सोच के भीतर ही अलग दुनिया बनती जाती है उसे परख लेने कि सोच ख़ुशियाँ नई उम्मीद जीवन के अंदर दे जाती है सोच ही नई रोशनी हर बार दे पाती है
पर अक्सर रात के अंधियारे को देखकर हमारी सोच ही जीवन मे डर जाती है रोशनी जो जीवन को अलग सुबह दे जाती है वह मुश्किल से ही हमारे जीवन मे आती है
सोच हर बार रंग बदलती रहती है पर कभी कभी अंधेरे से डरकर सच्ची सोच हमे धोखा दे जाती है वही तो जीवन कि सबसे बड़ी मुश्किल बन जाती है
क्योंकि सोच ही तो जीवन मे नया एहसास लाती है जो हमे हर बार आगे ले जाती है सोच तो हमे नई लकीर दे जाती है जो हाथों मे नहीं थी वह उम्मीदें दे जाती है
जीवन को नई शुरुआत जो अक्सर उम्मीदें तोहफे मे दे जाती है वह मन के लिए कभी कभी जीवन के अंदर नई सोच जीवन के साथ आगे ले जाती है
रात के अंदर अलग सोच जीवन मे नया एहसास जो जीवन को दे जाती है वही तो जीवन नई उम्मीद दे जाती है अगर जीवन को परखे तो रोशनी आती है
जब सही सोच इस्तमाल होती है रात से बिना डरे हमारी जिन्दगी बदलती है तो ही हर रात भी एक सुबह बनती है जो जीवन को हर बार नई रोशनी तोहफ़े मे देती है

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