Friday, 14 November 2025

कविता ५६९१. तराने की मुस्कान संग।

                            तराने की मुस्कान संग।

तराने की मुस्कान संग आशाओं की कहानी पहचान दिलाती है लहरों को खयालों की कोशिश अरमान दिलाती है उजालों की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग अंदाजों की पुकार इशारा दिलाती है अदाओं को एहसासों की तलाश परख दिलाती है दिशाओं की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग इशारों की आहट अल्फाज दिलाती है नजारों को लम्हों की सरगम आवाज दिलाती है राहों की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग अफसानों की सोच उम्मीद दिलाती है अल्फाजों को कदमों की आस रोशनी दिलाती है सपनों की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग अरमानों की सौगात तलाश दिलाती है इरादों को बदलावों की आवाज पहचान दिलाती है किनारों की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग नजारों की आस खयाल‌ दिलाती है अरमानों को सपनों की सुबह दास्तान दिलाती है अंदाजों की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग इशारों की लहर‌ किनारा दिलाती है जज्बातों को आशाओं की महफिल समझ दिलाती है कदमों की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग उम्मीदों की कोशिश पुकार दिलाती है आवाजों को धाराओं की सरगम इशारा दिलाती है किनारों की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग दास्तानों की सौगात अफसाना दिलाती है एहसासों को अल्फाजों की दुनिया दिशा दिलाती है इरादों की उमंग दिलाती है।

तराने की मुस्कान संग बदलावों की पहचान किनारा दिलाती है राहों को अंदाजों की अहमियत सपना दिलाती है अफसानों की उमंग दिलाती है।



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