Saturday, 22 November 2025

कविता. ५६९९. आशाओं संग किनारों पर।

                        आशाओं संग किनारों पर।

आशाओं संग किनारों पर सपनों की आहट एहसास दिलाती है इरादों को एहसासों की कोशिश उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर नजारों की पुकार आस दिलाती है कदमों को अल्फाजों की सरगम उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर खयालों की दुनिया अफसाना दिलाती है तरानों को लहरों की राह उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर कदमों की सौगात तलाश दिलाती है उजालों को जज्बातों की दुनिया उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर अरमानों की समझ मुस्कान दिलाती है आवाजों को दिशाओं की सुबह उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर अंदाजों की आस दास्तान दिलाती है लम्हों को अरमानों की सौगात उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर दास्तानों की परख रोशनी दिलाती है धाराओं को उम्मीदों की पहचान उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर धाराओं की उम्मीद कोशिश दिलाती है जज्बातों को बदलावों की लहर उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर अदाओं की सोच सुबह दिलाती है खयालों को सपनों की तलाश उमंग सुनाकर जाती है।

आशाओं संग किनारों पर तरानों की समझ इरादा दिलाती है नजारों को आवाजों की महफिल उमंग सुनाकर जाती है।

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कविता. ६०११ मुस्कान की सरगम से।

                           मुस्कान की सरगम से। मुस्कान की सरगम से किनारों संग पुकार खयाल दिलाती है आवाजों को लम्हों की कहानी अरमान दिलाती है...