Saturday, 18 June 2016

कविता ७५१. किसी सोच को समझकर

                                         किसी सोच को समझकर
किसी सोच को समझकर हम आगे जब जाते है जीवन कि कहानी को रोकना नही चाहते है आगे बढे बिना हमारी दुनिया नही बनती है
सोच को समझकर जीवन कि कहानी आगे जाती है जिसे दूसरों को समझाने कि जरुरत ही मेहसूस होती है जो ताकद देकर आगे बढती है
सोच के अंदर अगर ताकद हो तो उसे किसी सहारे कि जरुरत नही होती है क्योंकि सोच ही दुनिया को मकसद और मतलब देती जाती है
सोच को परखकर हर पल जीवन को समझ लेने कि जरुरत सही और मजबूत सोच को नही होती है वह दुनिया को खुशियाँ देकर आगे चलती है
जब सोच को मन से चुन ले तो जीवन कि तलाश कभी नही होती है जीवन मे सोच ही हमारी जिन्दगी बनकर आगे बढती चली जाती है जिसकी जरुरत हर याद होती है
सोच ही जीवन बन जाती है जिसकी हमे हर बार तलाश होती है जो जीवन को हर पल आगे लेकर जाती रहती है दिशाए देकर जाती है
सोच जीवन को समझ देकर लेकर हर पल जाती है जिसमे जीवन कि पेहचान हर बार होती है जिसे रखने के लिए जीवन कि साँसे बनती है
सोच ही तो हमारी दुनिया बनती है किस्मत कि हर पल हर बार आवाज बनती है जो जीवन को आगे लेकर जीवन को मकसद देकर चलती है
मन को सोच कि पेहचान मिलती है जिसके अंदर जीवन कि कहानी साँसे देकर हर पल आगे बढती चली जाती है नई सुबह हर बार देती है
सोच को समझकर आगे बढते रहने कि जरुरत जीवन मे हर मोड पर हर मौके पर हर बार मिलती है आगे बढती जाती है

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