Sunday, 19 June 2016

कविता ७५३. तूफानों पर हिलता जहाज

                                               तूफानों पर हिलता जहाज
जब कोई जहाज किनारे से भटक जाता है तूफानों से उलझकर ही तो यह सही दिशा मे हो पाता है तब कोई जीवन कि दिशाए बनाकर जाता है
जहाज जो जीवन को मकसद दे जाता है उसे किनारे से ज्यादा लहरों पर रहना ही भाता है क्योंकि वह जीवन को मतलब दे जाता है
जहाज जो पानी के उपर हिलता जाता है जीवन को धारा मे ही तो वह नई सुबह खोजता जाता है जीवन को आगे लेकर बढता चला जाता है
जहाज को जब तूफानों संग उलझना आता है तभी तो वह जीवन कि दिशाए बदलता जाता है नई सोच हमे जो आगे ले जाये उसकी खुशियाँ पाता है
हमे जिस जहाज कि जरुरत जीवन मे है वह हमारे मन का जहाज जीवन मे आगे बढना चाहता है जीवन को संभलकर आगे चलना चाहता है
जो बिना लढे ही जीवन मे हार मान ले तो जीवन को नई सोच हर पल पाता है जो तूफानों से उलझ लेते है उन्हे ही जीना आता है
जहाज जिसे हम समझ लेते है जीवन मे उसे जीवन मे कई दिशाओं मे मुडना आता है जो जीवन को नयी शुरुआत देकर आगे जाता है
तूफानों से ही तो जीवन मे आगे बढना आता है जिसे समझकर कई पलों को परखकर जीवन को आगे बढना आता है
मुश्किल को समझकर आगे बढते रहते है तो ही जीवन सच्ची खुशियाँ पा जाता है जीवन को आगे लेकर चलता जाता है
जो तूफानों मे भी हसना सीखता है उसका जीवन ही तो अक्सर खुशियाँ पाता है जीवन मे आगे बढते रहना चाहता है

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