Wednesday, 10 May 2023

कविता. ४८०२. उम्मीद कि रोशनी संग।

                                     उम्मीद कि रोशनी संग।

उम्मीद कि रोशनी संग दिशाएं सरगम देती है खयालों को अंदाजों कि आस पुकार दिलाती है तरानों को अरमानों कि सोच सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग अदाएं अल्फाज देती है कदमों को जज्बातों कि मुस्कान तलाश दिलाती है नजारों को राहों कि सुबह सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग आशाएं आवाज देती है तरानों को उजालों कि सुबह इशारा दिलाती है लहरों को किनारों कि मुस्कान सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग धाराएं सोच देती है आवाजों को बदलावों कि सौगात परख दिलाती है उजालों को सपनों कि कोशिश सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग दिशाएं कोशिश देती है किनारों को अल्फाजों कि राह रोशनी दिलाती है एहसासों को इशारों कि लहर सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग अदाएं अरमान देती है खयालों को एहसासों कि समझ पुकार दिलाती है अंदाजों को तरानों कि आस सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग आशाएं नजारा देती है लम्हों को आशाओं कि सोच एहसास दिलाती है अफसानों को अल्फाजों कि सरगम सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग धाराएं तराना देती है दास्तानों को कदमों कि आहट अहमियत दिलाती है उजालों को बदलावों कि सोच सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग अदाएं जज्बात देती है राहों को अंदाजों कि परख अफसाना दिलाती है कदमों को लम्हों कि सौगात सहारा देती है।

उम्मीद कि रोशनी संग दिशाएं सुबह देती है एहसासों को अरमानों कि कोशिश दास्तान दिलाती है खयालों को इशारों कि समझ सहारा देती है।

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