Tuesday, 30 May 2023

कविता. ४८२२. किनारों पर मुस्कान कि।

                                     किनारों पर मुस्कान कि।

किनारों पर मुस्कान कि तलाश लहर दिलाती है सपनों को एहसासों कि रोशनी पहचान दिलाती है खयालों को अंदाजों कि आस उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि आहट कोशिश दिलाती है दास्तानों को अदाओं कि पुकार खयाल दिलाती है लम्हों को अरमानों कि सुबह उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि आस रोशनी दिलाती है अंदाजों को बदलावों कि सौगात अरमान दिलाती है आवाजों को राहों कि तलाश उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि आवाज सपना दिलाती है दिशाओं को कदमों कि तलाश बदलाव दिलाती है नजारों को उजालों कि पुकार उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि परख सोच दिलाती है अरमानों को जज्बातों कि सोच आस दिलाती है दास्तानों को एहसासों कि समझ उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि अदा पहचान दिलाती है तरानों को उजालों कि सुबह परख दिलाती है आशाओं को बदलावों कि कोशिश उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि दास्तान अफसाना दिलाती है लम्हों को आवाजों कि धून आवाज दिलाती है अंदाजों को जज्बातों कि सरगम उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि बदलाव सौगात दिलाती है लहरों को एहसासों कि रोशनी सपना दिलाती है अफसानों को अल्फाजों कि सोच उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि रोशनी परख दिलाती है खयालों को अंदाजों कि तलाश बदलाव दिलाती है अरमानों को दिशाओं कि कहानी उम्मीद दिलाती है।

किनारों पर मुस्कान कि सोच एहसास दिलाती है इशारों को लम्हों कि पहचान कोशिश दिलाती है नजारों को दास्तानों कि परख उम्मीद दिलाती है।

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