Thursday, 17 August 2023

कविता. ४९०१. खयालों को अंदाजों की।

                                         खयालों को अंदाजों की।

खयालों को अंदाजों की आस अक्सर कोशिश दिलाती है कदमों को उजालों की पहचान परख दिलाती है लम्हों को सपनों की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की पुकार अक्सर आवाज दिलाती है किनारों को अल्फाजों की उमंग राह दिलाती है इशारों को आशाओं की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की रोशनी अक्सर अरमान दिलाती है राहों को अफसानों की समझ अदा दिलाती है लहरों को नजारों की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की सोच अक्सर दास्तान दिलाती है कदमों को लहरों की सौगात कोशिश दिलाती है आशाओं को बदलावों की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की सौगात अक्सर उम्मीद दिलाती है अदाओं को दिशाओं की कहानी आस दिलाती है उजालों को इशारों की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की परख अक्सर तलाश दिलाती है सपनों को एहसासों की राह आवाज दिलाती है नजारों को दिशाओं की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की कोशिश अक्सर पहचान दिलाती है इरादों को आशाओं की सोच अल्फाज दिलाती है बदलावों को राहों की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की सरगम अक्सर उमंग दिलाती है नजारों को उम्मीदों की आस पुकार दिलाती है इशारों को दास्तानों की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की अदा अक्सर कोशिश दिलाती है दास्तानों को एहसासों की आहट सरगम दिलाती है लहरों को नजारों की सुबह दिलाती है।

खयालों को अंदाजों की समझ अक्सर आवाज दिलाती है तरानों को उजालों की कोशिश अरमान दिलाती है सपनों को आशाओं की सुबह दिलाती है।

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