Thursday, 16 January 2025

कविता. ५३८९. इशारों को दास्तानों की।

                           इशारों को दास्तानों की।

इशारों को दास्तानों की कोशिश एहसास दिलाती है लहरों से आवाजों की धून मुस्कान दिलाती है किनारों को नजारों की कहानी सुनाती है।

इशारों को दास्तानों की उमंग खयाल दिलाती है अल्फाजों से आशाओं की परख सरगम दिलाती है दिशाओं को कदमों की कहानी सुनाती है।

इशारों को दास्तानों की सोच अफसाना दिलाती है सपनों से आवाजों की पुकार पहचान दिलाती है उजालों को जज्बातों की कहानी सुनाती है।

इशारों को दास्तानों की सुबह आस दिलाती है उम्मीदों से इरादों की सोच अफसाना दिलाती है अदाओं को आवाजों की कहानी सुनाती है।

इशारों को दास्तानों की आहट तलाश दिलाती है अंदाजों से बदलावों की सुबह तराना दिलाती है कदमों को राहों की कहानी दिलाती है।

इशारों को दास्तानों की परख रोशनी दिलाती है नजारों से खयालों की समझ इरादा दिलाती है एहसासों को आशाओं की कहानी दिलाती है।

इशारों को दास्तानों की सौगात सरगम दिलाती है अदाओं से तरानों की आहट लम्हा दिलाती है बदलावों को उम्मीदों की कहानी दिलाती है।

इशारों को दास्तानों की पुकार तराना दिलाती है उम्मीदों से नजारों की उमंग सहारा दिलाती है इरादों को अरमानों की कहानी दिलाती है।

इशारों को दास्तानों की तलाश सपना दिलाती है लम्हों से लहरों की अहमियत नजारा दिलाती है जज्बातों को खयालों की कहानी दिलाती है।

इशारों को दास्तानों की अदा कोशिश दिलाती है किनारों से राहों की सौगात तलाश दिलाती है अरमानों को लम्हों की कहानी दिलाती है।

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