Wednesday, 14 January 2026

कविता. ५७५२. लम्हों की रोशनी संग।

                             लम्हों की रोशनी संग।

लम्हों की रोशनी संग उम्मीदों की कहानी एक तलाश दिलाती है कदमों को जज्बातों की सरगम अक्सर खयालों की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग आशाओं की महफिल एक उमंग दिलाती है तरानों को बदलावों की कोशिश अक्सर दिशाओं की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग इशारों की आस एक अफसाना दिलाती है आवाजों को धाराओं की समझ अक्सर अंदाजों की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग खयालों की सोच एक मुस्कान दिलाती है अदाओं को एहसासों की सुबह अक्सर कदमों की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग अदाओं की लहर एक दास्तान दिलाती है नजारों को अरमानों की सौगात अक्सर तरानों की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग जज्बातों की आहट एक कोशिश दिलाती है इरादों को अरमानों की पहचान अक्सर उजालों की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग लहरों की सुबह एक पहचान दिलाती है अंदाजों को खयालों की कोशिश अक्सर किनारों की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग अफसानों की समझ एक‌ आवाज दिलाती है उम्मीदों को अंदाजों की कहानी अक्सर अदाओं की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग अल्फाजों की एहसास एक आस दिलाती है एहसासों को कदमों की अहमियत अक्सर लहरों की पुकार सुनाती है।

लम्हों की रोशनी संग नजारों की आवाज एक अहमियत दिलाती है उजालों को सपनों की उमंग अक्सर आशाओं की पुकार सुनाती है।


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