Thursday, 15 January 2026

कविता. ५७५३. तलाश कोई उमंग संग।

                         तलाश कोई उमंग संग।

तलाश कोई उमंग संग लहरों की पहचान दिलाती है अरमानों की महफिल से आवाजों की धून अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग कदमों की सौगात दिलाती है इशारों की सरगम से जज्बातों की रोशनी अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग खयालों की लहर दिलाती है आवाजों की आस से उम्मीदों की सुबह अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग दास्तानों की कोशिश दिलाती है अंदाजों की पहचान से नजारों की आहट अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग दिशाओं की महफिल दिलाती है बदलावों की पुकार से अफसानों की सोच अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग तरानों की मुस्कान दिलाती है लहरों की कहानी से किनारों की अहमियत अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग अंदाजों की पुकार दिलाती है कदमों की समझ से अल्फाजों की रोशनी अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग आशाओं की सोच दिलाती है उजालों की रोशनी से लहरों की कोशिश अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग उजालों की कहानी दिलाती है इरादों की सुबह से दास्तानों की आस अक्सर एहसास सुनाती है।

तलाश कोई उमंग संग जज्बातों की आहट दिलाती है लम्हों की अहमियत से धाराओं की पुकार अक्सर एहसास सुनाती है।


No comments:

Post a Comment

कविता. ५८४४. इशारों की आहट संग।

                           इशारों की आहट संग। इशारों की आहट संग आवाजों से जुडकर अंदाजों की समझ तलाश दिलाती है किनारों को कदमों की आस अरमान द...