Tuesday, 4 August 2026

कविता. ५९५० लम्हों को अल्फाजों की।

                         लम्हों को अल्फाजों की।

लम्हों को अल्फाजों की सरगम मुस्कान दिलाती है एहसासों को उम्मीदों की समझ तलाश दिलाती है धाराओं की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की कोशिश उमंग दिलाती है अरमानों को जज्बातों की आस अफसाना दिलाती है आशाओं की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की दुनिया सपना दिलाती है किनारों को अंदाजों की परख पहचान दिलाती है नजारों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की अहमियत तराना दिलाती है दिशाओं को बदलावों की सोच खयाल दिलाती है उजालों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की लहर इशारा दिलाती है दास्तानों को तरानों की पुकार आस दिलाती है राहों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की सौगात रोशनी दिलाती है अदाओं को दिशाओं की पहचान सहारा दिलाती है इरादों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की आस पुकार दिलाती है खयालों को कदमों की सौगात अंदाज दिलाती है लहरों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की तलाश आवाज दिलाती है सपनों को इशारों की आहट तराना दिलाती है अफसानों की ‌रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की सुबह नजारा दिलाती है अदाओं को दिशाओं की महफिल कहानी दिलाती है बदलावों की रोशनी दिलाती है।

लम्हों को अल्फाजों की मुस्कान उम्मीद दिलाती है दास्तानों को नजारों की सोच एहसास दिलाती है तरानों की रोशनी दिलाती है।



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कविता. ५९५० लम्हों को अल्फाजों की।

                         लम्हों को अल्फाजों की। लम्हों को अल्फाजों की सरगम मुस्कान दिलाती है एहसासों को उम्मीदों की समझ तलाश दिलाती है धाराओ...