Monday, 3 August 2026

कविता. ५९४९ कदमों को किनारों की।

                           कदमों को किनारों की।

कदमों को किनारों की समझ मुस्कान दिलाती है लहरों को खयालों की दुनिया एहसास दिलाती है उजालों को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की कहानी अफसाना दिलाती है अदाओं को अल्फाजों की सुबह आवाज दिलाती है जज्बातों को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की आस रोशनी दिलाती है दिशाओं को नजारों की पहचान अंदाज दिलाती है आशाओं को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की पुकार अरमान दिलाती है इशारों को बदलावों की कोशिश उम्मीद दिलाती है राहों को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की आवाज पहचान दिलाती है धाराओं को अरमानों की सोच तलाश दिलाती है लम्हों को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की सरगम तराना दिलाती है उम्मीदों को इशारों की आस अहमियत दिलाती है नजारों को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की उमंग इशारा दिलाती है आवाजों को धाराओं की सौगात सहारा दिलाती है अदाओं को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की उम्मीद सुबह दिलाती है अंदाजों को बदलावों की पुकार अरमान दिलाती है दास्तानों को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की कोशिश नजारा दिलाती है जज्बातों को एहसासों की राह सरगम दिलाती है दिशाओं को सपना दिलाती है।

कदमों को किनारों की सोच पहचान दिलाती है तरानों को अरमानों की अहमियत परख दिलाती है बदलावों को सपना दिलाती है।

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कविता. ५९५० लम्हों को अल्फाजों की।

                         लम्हों को अल्फाजों की। लम्हों को अल्फाजों की सरगम मुस्कान दिलाती है एहसासों को उम्मीदों की समझ तलाश दिलाती है धाराओ...