Monday, 17 August 2026

कविता. ५९६३ एक आवाज किसी किनारे से।

                       एक आवाज किसी किनारे से।

एक आवाज किसी किनारे से मुस्कान लेकर आती है अंदाजों को सपनों की पुकार अफसाना देकर‌ जाती है बदलावों की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से तराना लेकर आती है धाराओं को उम्मीदों की सौगात अल्फाज देकर जाती है अफसानों की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से खयाल लेकर आती है एहसासों को जज्बातों की रोशनी कोशिश देकर जाती है उजालों की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से अरमान लेकर आती है तरानों को आशाओं की महफिल उमंग देकर जाती है अदाओं की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से लम्हा लेकर आती है दास्तानों को राहों की पहचान लहर देकर जाती है कदमों की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से नजारा लेकर आती है दिशाओं को एहसासों की सोच परख देकर जाती है इशारों की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से अंदाज लेकर आती है कदमों को अदाओं की अहमियत दास्तान देकर जाती है लहरों की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से पुकार लेकर आती है तरानों को खयालों की सरगम आस देकर जाती है आशाओं की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से तलाश लेकर आती है लम्हों को दास्तानों की कोशिश रोशनी देकर जाती है नजारों की सुबह लाती है।

एक आवाज किसी किनारे से आस लेकर आती है अरमानों को दिशाओं की मुस्कान सरगम देकर जाती है अल्फाजों की सुबह लाती है।

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कविता. ५९६३ एक आवाज किसी किनारे से।

                       एक आवाज किसी किनारे से। एक आवाज किसी किनारे से मुस्कान लेकर आती है अंदाजों को सपनों की पुकार अफसाना देकर‌ जाती है बदल...