Tuesday, 18 August 2026

कविता. ५९६४ एक एहसास को इरादों की।

                        एक एहसास को इरादों की।

एक एहसास को इरादों की सुबह किनारा दिलाती है आशाओं की महफिल अक्सर कदमों संग आवाज की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की कोशिश नजारा दिलाती है लहरों की पहचान अक्सर लम्हों संग बदलाव की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की सोच जज्बात दिलाती है किनारों की सुबह अक्सर दास्तानों संग उम्मीद की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की रोशनी मुस्कान दिलाती है अफसानों की आहट अक्सर दिशाओं संग रोशनी की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की आस आवाज दिलाती है दिशाओं की कोशिश अक्सर राहों संग खयाल की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की उमंग पहचान दिलाती है सपनों की परख अक्सर किनारों संग मुस्कान की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की समझ अफसाना दिलाती है अंदाजों की सोच अक्सर लहरों संग कोशिश की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की सौगात अरमान दिलाती है अल्फाजों की दुनिया अक्सर उजालों संग समझ की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की उम्मीद सोच दिलाती है खयालों की आहट अक्सर धाराओं संग अहमियत की पुकार देकर जाती है।

एक एहसास को इरादों की राह तलाश दिलाती है बदलावों की सोच अक्सर उम्मीदों संग सरगम की पुकार देकर जाती है।


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कविता. ५९६४ एक एहसास को इरादों की।

                        एक एहसास को इरादों की। एक एहसास को इरादों की सुबह किनारा दिलाती है आशाओं की महफिल अक्सर कदमों संग आवाज की पुकार देकर...