Friday, 14 August 2026

कविता. ५९६० खयालों की सरगम संग।

                              खयालों की सरगम संग।

खयालों की सरगम संग आवाजों की धून पहचान दिलाती है लहरों को दास्तानों की सौगात तलाश दिलाती है राहों को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग इरादों की आस रोशनी दिलाती है कदमों को अल्फाजों की पुकार सहारा दिलाती है धाराओं को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग किनारों की सुबह एहसास दिलाती है सपनों को अंदाजों की कोशिश आवाज दिलाती है लम्हों को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग सपनों की आहट अल्फाज दिलाती है एहसासों को उजालों की उम्मीद तराना दिलाती है दिशाओं को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग अरमानों की समझ कोशिश दिलाती है अफसानों को धाराओं की आस किनारा दिलाती है उम्मीदों को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग नजारों की उमंग इरादा दिलाती है बदलावों को आशाओं की सुबह राह दिलाती है अदाओं को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग तरानों की पुकार मुस्कान दिलाती है आवाजों को दिशाओं की सौगात उजाला दिलाती है नजारों को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग एहसासों की महफिल इशारा दिलाती है लम्हों को अरमानों की सोच सपना दिलाती है अल्फाजों को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग लम्हों की कहानी सोच दिलाती है उम्मीदों को धाराओं की समझ तलाश दिलाती है आशाओं को जज्बात दिलाती है।

खयालों की सरगम संग कदमों की परख उमंग दिलाती है इरादों को दिशाओं की पहचान तराना दिलाती है अंदाजों को जज्बात दिलाती है।


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कविता. ५९६२ खयाल को आस हमेशा।

                            खयाल को आस हमेशा। खयाल को आस हमेशा एहसास दिलाती है तरानों को धाराओं की समझ अरमान दिलाती है अंदाजों को सपनों की आ...