Saturday, 22 August 2026

कविता. ५९६८ सोच की पहचान अक्सर।

                          सोच की पहचान अक्सर।

सोच की पहचान अक्सर एहसास दिलाती है जज्बातों को लम्हों की सरगम तलाश दिलाती है धाराओं की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर खयाल दिलाती है अरमानों को दिशाओं की महफिल कहानी दिलाती है तरानों की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर अंदाज दिलाती है उम्मीदों को अफसानों की सुबह लहर दिलाती है आवाजों की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर मुस्कान दिलाती है अदाओं को इशारों की धून कोशिश दिलाती है एहसासों की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर पुकार दिलाती है राहों को अरमानों की आवाज बदलाव दिलाती है अंदाजों की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर आवाज दिलाती है धाराओं को नजारों की समझ तलाश दिलाती है किनारों की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर सपना दिलाती है अफसानों को कदमों की आस आवाज दिलाती है इशारों की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर अल्फाज दिलाती है नजारों को आशाओं की परख इरादा दिलाती है अंदाजों की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर सुबह दिलाती है दिशाओं को अंदाजों की पुकार सरगम दिलाती है बदलावों की उमंग दिलाती है।

सोच की पहचान अक्सर रोशनी दिलाती है कदमों को दास्तानों की सौगात तलाश दिलाती है खयालों की उमंग दिलाती है।

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कविता. ५९६८ सोच की पहचान अक्सर।

                          सोच की पहचान अक्सर। सोच की पहचान अक्सर एहसास दिलाती है जज्बातों को लम्हों की सरगम तलाश दिलाती है धाराओं की उमंग दि...