Saturday, 8 August 2026

कविता. ५९५४ हर लम्हे की सरगम संग।

                            हर लम्हे की सरगम संग।

हर लम्हे की सरगम संग खयालों की सौगात इशारा देती है एहसासों को उजालों की समझ तराना देती है आशाओं को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग आवाजों की धून दास्तान देती है खयालों को नजारों की कोशिश अफसाना देती है राहों को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग दिशाओं की महफिल उमंग देती है कदमों को अल्फाजों की आस बदलाव देती है धाराओं को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग उजालों की अंदाज कोशिश देती है तरानों को जज्बातों की सोच पुकार देती है किनारों को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग अदाओं की सुबह उजाला देती है इशारों को आशाओं की अहमियत मुस्कान देती है लहरों को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग जज्बातों की आस पुकार देती है खयालों को अरमानों की पहचान रोशनी देती है दास्तानों को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग उम्मीदों की कहानी सहारा देती है अफसानों को अदाओं की सौगात तलाश देती है नजारों को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग धाराओं की परख समझ देती है धाराओं को कदमों की आवाज उमंग देती है दिशाओं को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग इशारों की आवाज जज्बात देती है अरमानों को अल्फाजों की कोशिश आस देती है इरादों को सपना देती है।

हर लम्हे की सरगम संग किनारों की रोशनी लहर देती है अंदाजों को दिशाओं की महफिल पहचान देती है अफसानों को सपना देती है।

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कविता. ५९५५ आस को उजालों संग।

                               आस को उजालों संग। आस को उजालों संग आवाज इशारा देती है कदमों को अल्फाजों की समझ मुस्कान देती है लहरों को दिशाओ...