Thursday, 6 August 2026

कविता. ५९५२ एक कोशिश संग अफसानों की।

                       एक कोशिश संग अफसानों की।

एक कोशिश संग अफसानों की महफिल खयाल दिलाती है लहरों को दास्तानों से उम्मीद जज्बात दिलाती है धाराओं की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की सोच सरगम दिलाती है उजालों को सपनों से मुस्कान एहसास दिलाती है राहों की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की लहर सुबह दिलाती है कदमों को अरमानों से आवाज इरादा दिलाती है नजारों की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की आस दास्तान दिलाती है धाराओं को अंदाजों से सरगम परख दिलाती है किनारों की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की रोशनी आवाज दिलाती है लम्हों को आशाओं से उमंग अल्फाज दिलाती है दिशाओं की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की पहचान कहानी दिलाती है नजारों को अदाओं से अहमियत रोशनी दिलाती है बदलावों की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की सौगात तलाश दिलाती है आवाजों को तरानों से पुकार अदा दिलाती है अरमानों की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की तलाश एहसास दिलाती है जज्बातों को आशाओं से पहचान तराना दिलाती है उम्मीदों की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की आहट इशारा दिलाती है अल्फाजों को दिशाओं से सौगात सपना दिलाती है जज्बातों की समझ दिलाती है।

एक कोशिश संग अफसानों की उमंग अंदाज दिलाती है एहसासों को लहरों से सुबह नजारा दिलाती है खयालों की समझ दिलाती है।


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कविता. ५९५५ आस को उजालों संग।

                               आस को उजालों संग। आस को उजालों संग आवाज इशारा देती है कदमों को अल्फाजों की समझ मुस्कान देती है लहरों को दिशाओ...